इसे नई शुरुआत करना भी कहा जा सकता है.
विस्तार
इसके तहत किसी विभाग या संगठन द्वारा प्रस्तावित खर्च की हर मद को बिलकुल नई मद मानकार या आधार शून्य मानते हुए फिर से मूल्यांकन किया जाता है. इसमें गत बजट की घटनाओं का कोई औचित्य नहीं होता. 1987-88 से केंद्र सरकार ने इसे सभी विभागों और मंत्रालयों में लागू करने का फैसला किया.
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आउटकम बजटभारत में आउटकम बजट की शुरुआत 2005 में हुई.निष्पादन बजटबजट का वह रूप, जो खर्च के साथ उसके नतीजों पर भी जोर देता है.जेंडर बजटिंगबजट में महिला सशक्तिकरण तथा शिशु कल्याण के लिये किये जाने वाले धन आवंटन के उल्लेखन को जेंडर बजटिंग कहा जाता है.पारंपरिक बजटआम बज ट का शुरुआती रूप जिसमें अर्थव्यवस्था में खर्च किये जाने वाले धन का उल्लेख तो होता है पर यह नहीं जिक्र होता कि इस खर्च से क्या परिणाम सामने आयेगा.
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