रेल की दो पटरियों की भीतरी सतहों के बीच की दूरी को गेज कहते हैं.
ब्रॉड गेज1,676 मिमी
मीटर गेज1,000 मिमी
नैरो गेज762 और 610 मिमी
विस्तार
भारत में मुख्य रूप से तीन तरह के गेज रहे हैं. ब्रॉड गेज (1,676 मिमी यानी 5 फुट 6 इंच) भारतीय रेल का मुख्य गेज है. मीटर गेज 1,000 मिमी का होता है.
नैरो गेज के दो प्रमुख आकार 762 मिमी (2 फुट 6 इंच) और 610 मिमी (2 फुट) हैं, जो अब मुख्य रूप से पहाड़ी और धरोहर रेल लाइनों पर बचे हैं. “प्रोजेक्ट यूनिगेज” के तहत मीटर और नैरो गेज की बहुत सी लाइनों को ब्रॉड गेज में बदला गया है.
दूसरे नाम और खोज-शब्द
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रेल विद्युतीकरणभारत में पहली बिजली से चलने वाली रेल तीन फरवरी 1925 को बॉम्बे वीटी से कुर्ला के बीच 1,500 वोल्ट डीसी प्रणाली पर चली.रेल बजटरेलवे के वित्त को सरकार के सामान्य वित्त से अलग रखने की परंपरा 1924 में शुरू हुई, और 1924-25 से रेल बजट अलग से पेश होने लगा.डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोरडेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) सिर्फ मालगाड़ियों के लिए बनी अलग रेल लाइनें हैं.भारतीय रेल का इतिहासभारत में पहली यात्री रेल 16 अप्रैल 1853 को बॉम्बे के बोरी बंदर से ठाणे के बीच लगभग 34 किलोमीटर चली. इसमें 14 डिब्बे थे और लगभग 400 यात्री सवार थे.
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