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भारतीय रेल का इतिहास

History of Indian Railways · इतिहास

विषयइतिहास
सार

भारत में पहली यात्री रेल 16 अप्रैल 1853 को बॉम्बे के बोरी बंदर से ठाणे के बीच लगभग 34 किलोमीटर चली. इसमें 14 डिब्बे थे और लगभग 400 यात्री सवार थे.

पहली यात्री रेल16 अप्रैल 1853, बोरी बंदर से ठाणे
रेलवे बोर्ड1905
पहली बिजली रेल3 फरवरी 1925

विस्तार

रेल की योजना 1840 के दशक में शुरू हुई. 1843 में बॉम्बे सरकार के मुख्य अभियंता जॉर्ज क्लार्क ने बॉम्बे को ठाणे और कल्याण से जोड़ने का विचार रखा. गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी के 20 अप्रैल 1853 के प्रसिद्ध “रेलवे मिनट” ने देश में रेल नेटवर्क के विस्तार की नीति तय की.

पूर्वी भारत में पहली यात्री रेल 15 अगस्त 1854 को हावड़ा से हुगली के बीच, दक्षिण में एक जुलाई 1856 को मद्रास क्षेत्र में और उत्तर में तीन मार्च 1859 को इलाहाबाद से कानपुर के बीच चली. शुरुआती रेल लाइनें निजी ब्रिटिश कंपनियों ने बनाईं, जिन्हें सरकार ने अपनी पूंजी पर तय मुनाफे की गारंटी दी थी.

रेलवे बोर्ड ने 1905 में काम शुरू किया. देश की पहली बिजली से चलने वाली रेल तीन फरवरी 1925 को बॉम्बे वीटी से कुर्ला के बीच चली. आजादी के समय देश में 42 अलग-अलग रेल प्रणालियां थीं, जिनमें 32 पूर्व रियासतों की थीं. विभाजन में लगभग 40 प्रतिशत रेल लाइनें पाकिस्तान में चली गईं.

1951-52 में राष्ट्रीयकरण और क्षेत्रीय (जोनल) पुनर्गठन से आज की भारतीय रेल का ढांचा बना.

दूसरे नाम और खोज-शब्द

History of Indian Railwaysindian railways historyपहली रेल 1853

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