अमरीश पुरी (1932-2005) हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार खलनायकों में से एक थे. “मिस्टर इंडिया” का उनका संवाद “मोगैम्बो खुश हुआ” आज भी मशहूर है.
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उनके भाई मदन पुरी भी अभिनेता थे. फिल्मों से पहले वह रंगमंच पर सक्रिय रहे और 1979 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला. श्याम बेनेगल की “निशांत”, “मंथन” और “भूमिका” से उन्हें पहचान मिली. अस्सी और नब्बे के दशक में वह हिंदी फिल्मों के प्रमुख खलनायक रहे.
“विधाता”, “हीरो”, “मिस्टर इंडिया”, “त्रिदेव”, “घायल” और “करण अर्जुन” उनकी प्रमुख फिल्में हैं.
स्टीवन स्पीलबर्ग की “इंडियाना जोन्स एंड द टेंपल ऑफ डूम” (1984) में मोला राम की भूमिका से उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली. बाद में “दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे”, “घातक”, “परदेस” और “विरासत” में उनकी चरित्र भूमिकाएं भी यादगार रहीं. “मेरी जंग”, “घातक” और “विरासत” के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का फिल्मफेयर मिला. 12 जनवरी 2005 को उनका निधन हुआ.
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